सामाजिक कार्याें के प्रति भी सक्रिय है राजस्थान पुलिस

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जयपुर - पुलिस का मुख्य दायित्व है कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखना। यह सुखद है कि राजस्थान पुलिस कानून व्यवस्था बनाये रखने, अपराधों की रोकथाम एवं अपराधियों की धरपकड़ जैसे दिन-प्रतिदिन कार्यों के निस्तारण के साथ ही सामाजिक सरोकारों से कार्यों के प्रति भी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। बेघर बेसहारा व्यक्तियों एवं भिक्षावृति से आजीविका चलाने वालों के पुर्नवास, मृत्युभोज जैसी कुप्रथा के निवारण के साथ ही नशीले पदाथोर्ं के विरूद्ध अभियान आदि समाज उपयोगी कार्यों में भी राजस्थान पुलिस सक्रिय भूमिका निभा रही है। 

महानिदेशक पुलिस  भूपेन्द्र सिंह निरन्तर पुलिस कर्मियों को अपने राजकीय उत्तदायित्वों के कुशलता से निर्वहन के साथ ही सामाजिक सरोकारों के प्रति भी सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। कोरोना काल के दौरान पुलिस कर्मियों ने आमजन को भोजन सामग्री व दवाईयां आदि उपलब्ध करवाने के साथ ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाकर अपने मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया। वंचित वर्ग, श्रमिकों, बुजर्गों व बच्चों के प्रति संवेदनशीलता से किये गये कार्यो की व्यापक स्तर पर प्रशंसा भी हो रही है। 

इसी प्रकार अतिवृष्टि की परिस्थितियों में भी राज्य आपदा राहत बल द्वारा उल्लेखनीय बचाव कार्यों की भी सराहना हुई है। पुलिस बल की विभिन्न जिला इकाई द्वारा भी अपने अपने स्तर पर बेघरों के पुर्नवास, वंचित वर्ग की मदद, मृत्यूभोज जैसी कुरीतियों की रोकथाम एवं नशीली वस्तुओं के रोकथाम जैसे कार्यों में अभिनव प्रचार कर रही है। 

भिखारियों का सर्वेक्षण

इस कड़ी में आयुक्तालय जयपुर में पुलिस आयुक्त  आनन्द श्रीवास्तव के दिशा निर्देश पर भिक्षावृति से आजिविका चलाने वाले बेसहारा, अशिक्षित, बेरोजगार और दिव्यांग महिलाओं, बच्चों के पुर्नवास के लिये बेघर योजना बनायी गयी। योजनानुसार भिखारियों के सर्वेक्षण हेेतु जिलेवार टीम गठित कर जिला उत्तर में 248, जिला दक्षिण में 298, जिला पूर्व में 330 तथा जिला पश्चिम में 286 कुल 1162 भिखारियों को पुर्नवास हेतु चिन्हित किया। इनमें 939 पुरूष और 223 महिला शामिल है। इनमें 264 व्यक्ति गम्भीर बीमारियों से पीडित और दिव्यांगजन भी शामिल थे।

सर्वेक्षण के दौरान सादा वस्त्रधारी सर्वेक्षण टीमों ने भिखारियों को मास्क, चप्पल, बिस्किट पैकेट्स, सेनेटरी नैपकिन्स, भोजन एवं बे्रड के पैकेट्स आदि सामान का वितरण भी किया। स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर पुलिस आयुक्तालय ने समाज कल्याण विभाग व एनजीओ के सहयोग से वृद्ध, दिव्यांग, गम्भीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को एकत्र कर तथा 15 से 20 दिनों तक रखकर उनके बालों की कटिंग करवायी तथा वस्त्र आदि उपलब्ध करवाने के साथ ही मेडिकल चैकअप करवाया गया। मेडिकल चैकअप के दौरान कुछ भिखारियों के कोरोना पॉजिटव आने पर पुर्नवास  के कार्यक्रम को उनके स्वस्थ होने तक रोक दिया गया। कोरोना सक्रमण के मध्यनजर आवश्यक सावधानियों के साथ 23 सितम्बर से एकत्रित भिखारियों का पुर्नवास कार्यक्रम पुनः प्रारम्भ किया जा रहा है। भिक्षावृति सर्वे के अनुसार भिखारियों को उनके कौशल के अनुसार काम सिखाने व उनकी योग्यता के अनुसार कार्य दिलाये जाने की एनजीओ की सहायता ली जा रही है। इनके समाज की मुख्य धारा से जुडने पर अपराधों पर अंकुश लगेगा एवं जयपुर को भिक्षावृति मुक्त, नशामुक्त व अपराध मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। 

ऑपरेशन क्लीन स्वीप

जयपुर शहर में छात्र छात्राओं एवं युवावर्ग में नशीले एवं मादक पदाथोर्ं के सेवन की बढती प्रवृति एवं इससे संबंधित अपराधों में वृद्धि को देखते हुए जयपुर पुलिस द्वारा  ’’ड्रग्स फ्री जयपुर’’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए ’’ऑपरेशन क्लीन स्वीप’’ प्रारम्भ किया गया है। मादक एवं नशीले पदार्थ सप्लाई करने वाले अपराधिक तत्वों तथा मादक पदाथोर्ं की सप्लाई चैन को चिन्हित कर इससे जुड़े प्रत्येक अपराधी के विरूद्ध कार्यवाही कर मादक पदार्थों की उपलब्धता पर कठोर अंकुश लगाने के प्रयास किये जा रहे है।

ऑपरेशन क्लीन स्वीप के अन्तर्गत स्वयं सेवी संगठनों, निजी संस्थानों, मीडिया समूहों तथा विशेषज्ञों के सहयोग से ड्रग्स प्रभावित क्षेत्रों, युवाओं एवं शैक्षणिक संस्थानों में नशे व मादक पदार्थों के विरूद्ध जागरूकता के लिए व्यापक अभियान प्रारम्भ किया जा रहा है। इस अभियान में पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों के एक दल द्वारा सभी शैक्षणिक संस्थानों एवं ड्रग्स प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान से जागृत करने के साथ ही मादक पदार्थों की सप्लाई करने वालों की सूचना को देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। थानाधिकारी से लेकर बीट कॉन्स्टेबल तक उनके क्षेत्र में स्थित नशे के आदी लोगों को चिन्हित कर नशा मुक्ति एवं पुर्नवास हेतु सरकारी एवं एनजीओ की मदद से उन्हें सामान्य जीवन में लाने का प्रयास किया जा रहा है। 

442 तस्कर व पैडलर गिरफ्तार

जयपुर पुलिस द्वारा 25 अक्टुबर 2019 से प्रारम्भ ’’ऑपरेशन क्लीन स्वीप’’ के तहत अब तक 343 प्रकरण दर्ज कर 442 तस्करों व पैडलरों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 58 महिलाएं भी शामिल है। गिरफ्तार व्यक्तियों से करीब 25 लाख रूपये नकद एवं तस्करी में प्रयुक्त 73 वाहन बरामद किये गये। इस ऑपरेशन के दौरान जब्त किये गये मादक पदार्थों में गांजा, अफीम, चरस, स्मैक, डोडा पोस्त, कोकीन व एमडीएमए, ब्राउन शुगर एवं एलएसडी (लिसर्जिक एसीड डाईएथिलेमाइड) ड्रग्स, कोडैक्स फॉस्फेट सीरप आदि प्रमुख है। 

ऑपरेशन ’’क्लीन स्वीप’’ के तहत गांजा 32 क्विटंल 50 किलो, डोडा पोस्त छिल्का 3 क्विटंल 22 किलो, अफीम 16 किलोग्राम 603 ग्राम, चरस 3 किलोग्राम 723 ग्राम, स्मैक 696 ग्राम, ब्राउन शुगर 18 ग्राम, कोकीन 26 ग्राम व एमडीएमए  88 ग्राम, एलएसडी ड्रग्स 140 मिलीग्राम, भांग 1 किलो 955 ग्राम, ट्रोमाडोल व एप्राजोल मेडिसन (ड्रग्स) 2612  एवं कोडेन फॉस्फेट कुल 134 सीरप बरामद किये जा चूके है। 

जयपुर में मादक पदार्थों की सप्लाई का रूट भी चिन्हित किया गया है। शहर में गांजा की सप्लाई उड़ीसा, बंगाल, आन्ध्रप्रदेश, बिहार, छतीसगढ, झारखण्ड, पूर्वाेतर राज्यों व नेपाल से, अफीम की चितौडगढ, झालावाड़, प्रतापगढ, मंदसौर, नीमच एवं मालदा (प.बं.) से, स्मैक की झालावाड, टोंक से, डोडा पोस्त की चितौड, झालावाड़ से एवं मॉर्डन ड्रग्स, चरस, कोकिन, ब्राउन शुगर की सप्लाई हिमाचल प्रदेश, मुम्बई व दिल्ली से हो रही है। 

मादक पदार्थों का उपभोग अधिकांशतः युवा वर्ग द्वारा किया जाता है। निम्न आय वर्ग के गरीब व कच्ची बस्तियों के युवाओं द्वारा मुख्यतः स्मैक का सेवन किया जाता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ये स्मैक की खरीद-फरोख्त के लिए छोटे-मोटे अपराध भी करते हैं। मध्यम आय वर्ग वाले एवं कोचिंग द्वारा मुख्यतः गांजा, मॉर्डन ड्रग्स, कोकीन, ब्राउन शुगर, चरस, नशीले टेबलेट्स एवं कोडैक्स फॉस्फेट सीरप का प्रयोग किया जाता है। उच्च आय वर्ग के युवक-युवतियाें द्वारा गांजा एवं मॉडर्न ड्रग्स का सेवन किया जाता है। नशेे की गिरफ्त में आये व्यक्तियों की राजकीय चिकित्सा संस्थानों व एनजीओं के सहयोग से काउन्सलिंग का भी प्रयास किया जा रहा है। 

 


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