जीवन मे  क्रतज्ञता होनी चाहिये - प्रमाण सागर जी

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कटनी -  मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने गोशाला मे प्रवचन देते हुये जो हमारे जीवन मे क्रतज्ञता होनी चाहिये लेकिन आज उल्टा हो रहा है क्रतज्ञता प्रकट करने के बजाय लोग अहसान फरामोश हो गये है  मुनि श्री ने कहा किसी के प्रति अहसान कर भूलो लेकिन जो तुम्हारे जीवन मे काम आये उसके अहसान के प्रति तुम क्रतज्ञता रखो उसको भूलो नहीं विस्तार से वर्णन करते हुये मुनि श्री ने कहा क्रतज्ञ होने का मतलब यह नहीं हम उसकी हर बात माने लेकिन मर्यादा और सीमा मे रहकर उस व्यक्ति के प्रति क्रतज्ञ रहो मर्यादा यदि टूट जाती है तो विसगति आती है धरती माता के प्रति क्रतज्ञ रहो माता पिता दाता और गुरु के प्रति क्रतज्ञ रहो 

मुनि श्री ने एक द्रष्टान के माध्यम से बताया एक गाव मे बाद आयी सब कुछ बह गया एक बच्चा अनाथ हो गया गाव वालो ने शहर  एक सेठ के यहा उसको रख दिया व सेठ के साथ रहकर जीवन यापन करने लगा व विलक्षण प्रतिभा का धनी था सेठ ने उसे अपने  व्यापार मे सांझेदार बना लिया उसका विवाह कर दिया खूब प्रगति हो गयी उसने एक दिन पिताजी से कहा मै गाव जाकर व्यवसाय करना चाहता हु ताकि उन गाव वालो का ऋण चुका सकू जिनके कारण यहा आया पिता ने  अनुमति दी कुछ पैसा दिया व गाव मे व्यवसाय करने लगा चारो और उसकी ख्याति हो गयी लेकिन सेठ व्यवसाय चॉपट होने लगा तब व सेठ अपने बेटे के यहा आया तो उस बेटे ने भरपूर स्वागत किया सभी काम कर रहे लोगो से कहा आज जो कुछ हु  इन्ही की वजह से हु सेठ ने आप बीती सुनाई उस बेटे ने कहा पिताजी जो कुछ है व सब आपका है शहर जाकर उस व्यवसाय को भी उस बालक ने वापस प्रगति पर ला खड़ा किया और पिताजी को सोप दिया यह है क्रतज्ञता का भाव लेकिन आज लोग अहसान फरामोश हो गये 

मुनि श्री ने कहा सदा उपकार का भाव होना चाहिये  आज उल्टा हो रहा है मंदिर की दुकान खाली करवाने के लिये किरायदार उल्टा पैसा ले रहे है शास्त्रो मे इसे नरकायु बंध का कारण बताया उन्होने कहा क्रतज्ञता के गुण को ग़हराई से समझना चाहिये जो मदद करे व व्यक्ति सदा स्मरण मे रहना चाहिये 

गुरु महाराज समस्त श्रेय  आचार्य गूरुवर ज्ञानसागर जी को देते है  मुनि श्री ने कहा गुरु लोकोतर जीवन का उन्नत करते है उंनके उपकार अनंत है अबोध को बोध कराते है अंधेरों को रोशनी से भर देते है गुरु के प्रति क्रतज्ञ रहे उनका ऋण स्मरण करो हम गुरु का गुणानुवाद कर गुरू के प्रति  क्रतज्ञता प्रकट करे हम गुरू का गौरव बना रहे आचार्य श्री विद्यासागर  जी महाराज समस्त शेर्य गुरू का नाम गुरू आचार्य  ज्ञानसागर जी को देते है हमे सीख लेनी चाहिये जो सचमुच एक आदर्श है 

               


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