वर्तमान समय में व्यक्ति जितना स्वयं के दुखों से  दुखी नहीं है उतना दूसरों के सुख से दुखी है - पुलक सागर जी

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 बांसवाड़ा - आचार्य श्री  पुलक सागरजी महाराज  ने अपने मार्मिक  उदबोधन  में कहा कि इस संसार में कोई निर्धन  नहीं होता। संसार में प्रत्येक इंसान अपने आप को अभावग्रस्त और दुखी समझता  है। वह सोचता है कि हमसे ज्यादा परेशान दूसरा कोई हो ही नहीं सकता। इस और ध्यान  आकर्षित करते हुये आचार्य श्री ने कहा इस दुख  का मुख्य कारण सिर्फ एक ही है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी तुलना अपने से ऊंचे स्तर  पर रहने वाले लोगों से करता है। कभी भी उसकी दृष्टि अपने से निम्न स्तर पर  जीवन व्यतीत करने वाले लोगों की तरफ नहीं जाती। संसार में किसी के भी दुख  का कारण पंचेन्द्रिय के विषय भोगों का अभाव न होकर दूसरों के पास उन  वस्तुओं का सदभाव है। वर्तमान समय में व्यक्ति जितना स्वयं के दुखों से  दुखी नहीं है उतना दूसरों के सुख से दुखी है। स्वयं के घर में दस लाख की  कार खड़ी है फिर भी मन दुखी है, क्योंकि पड़ोस में बीस लाख रुपए की कार  खड़ी है। आचार्य जी ने कहा कि पर्व के दिनों में महिलाएं सुंदर सुंदर  वस्त्र पहनकर प्रफुल्लित मन से मंदिर आती है। वह सोचती है कि आज मंदिर में  सबसे विशेष वस्त्र आभूषण मेरे ही दिखाई देंगे, लेकिन मंदिर पहुंचते ही उनका  सुख काफूर हो जाता है। क्योंकि उनको अपने से सुंदर वस्त्र पहने हुए दूसरी  नारियों के दर्शन हो जाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि इस संसार में कोई  गरीब या कोई दुखी नहीं है बस अपने मन पर काबू नहीं कर पाते। हम दूसरों से  तुलना कर बैठते हैं। यही हमारे दुख एवं गरीबी का कारण होता है। इसलिए मेरी  बात अगर मानो तो इस दुनिया में या इस संसार में कोई गरीब नहीं होता।
                  


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