माेबाइल ने दुनिया से जाेड़ा, लेकिन अपनों से दूर कर दिया-आचार्य सुनील सागरजी

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आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में भगवान आदिनाथ का चरित्र चित्रण करते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ प्रथम तीर्थंकर, प्रथम राजा, प्रथम कृषक, प्रथम व्यापारी रहे। उन्होंने असि, मसी, कृषि आदि विद्याओं का ज्ञान करवाकर प्रजा को अपने पालन करने और अपने भरण पोषण करने के तरीके बताएं। साथ ही उन्होंने शस्त्र सिखा कर अपनी रक्षा करने का उपक्रम भी बताया। आचार्य श्री ने आगे कहा आज के इंसान और वैज्ञानिकों ने ऐसे उपक्रम बनाए जिससे लोगों में कटुता वैमनस्यता बढ़ती जा रही है। जैसे मोबाइल ने दुनिया से जोड़ दिया, लेकिन अपनों से दूर कर दिया। आचार्य ने दान की महिमा का बखान करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी क्षमता होने पर दान अवश्य करना चाहिए। जो सक्षम है उसके बाद भी अगर वह दान नहीं करता है। अपना धन उचित जगह पर नहीं लगाता है। उसका पैसा कहीं दूसरी जगह लगता है जैसे अस्पताल या अन्य जगह पर लगेगा। हमें अपने बच्चों में भी दान के संस्कार डालने चाहिए। वह भविष्य में बड़े होकर दान के संस्कार ले और भविष्य में दान करें। जिससे समाज और धर्म का विकास होता रहे।

 


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