प्रेम जीवन का महामंत्र आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की कड़ी प्रेम ही है

Jainism

वरुण पथ मानसरोवर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर  मुनि विभंजन सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया प्रेम जीवन का महामंत्र है यह वह मंत्र है जो सारी दुनिया को वश में करने की ताकत रखता है प्रेम ही जीवन है। जीवन से प्रेम को निकाल दिया जाए तो शायद जीवन में कुछ बचेगा  ही नहीं ।दिल से दिल को जोड़ने वाली कोई कड़ी है तो वह है प्रेम। माता- पिता, भाई- बहन पति -पत्नी, मित्र- मित्र, गुरु- शिष्य,भक्त - भगवान, आत्मा- परमात्मा जैसे सभी संबंध प्रेम पर ही टिके हुये है। प्रेम ही बंधन है, प्रेम ही मुक्त। भगवान महावीर कहते हैं की मोह सहित प्रेम बंधन है,  मोह रहित प्रेम मुक्ति है ।प्रेम वासना विहीन होता है तो स्वतंत्रता बनता है, वासना सहित होता है तो, परतंत्रता बनता है। प्रेम अमृत भी है और जहर भी।  प्रेम जब किसी एक में  सिमटता है, तो वासना का जहर बनता है और प्रेम जब प्राणी मात्र के प्रति विराट होता है, तो अमृत हो जाता है।

समिति अध्यक्ष एम पी जैन ने बताया कि 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुवर की पूजा, शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन होगा व 17 जुलाई को वीर शासन जयंती पर   विशेष कार्यक्रम रखा जाएगा।

 प्रवक्ता सुनील गंगवाल ने बताया गुरुदेव के 14वा चातुर्मास कलश स्थापना रविवार, 21 जुलाई को होगी।


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