आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज ससंघ का 45 वां वर्षायोग कलश स्थापना समारोह पटना (बिहार) में 14 जुलाई को आयोजित होगा

Jainism

सकल दिगम्बर जैन समाज पटना के असीम पुण्योदय से चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज के परंपरा के तृतीय पट्टाचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री 108 विपुल सागर जी महाराज ससंघ का 45 वां चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह 14 जुलाई रविवार को श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर , काँग्रेस मैदान , पटना (बिहार) में धूमधाम के साथ आयोजित किया जा रहा है।

महामुनि श्री सेठ सुदर्शन स्वामी की पावन निर्वाण भूमि पाटलिपुत्र नगरी (पटना) में जैन संतो के चार माह का चातुर्मास को लेकर सकल जैन समाज के बीच अतिउत्साह व उमंग देखने को मिल रहा है। 
मालूम हो कि आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज ससंघ का 44 वां 2018 का चातुर्मास पटना में ही हुआ था। आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज संघस्थ साधु आचार्य श्री भद्रबाहु सागर जी महाराज और मुनि श्री भरतेश सागर की महाराज ससंघ का 2019 में भी पावन वर्षायोग का सौभाग्य पुनः पटना दिगम्बर जैन समाज को प्राप्त हुआ है।

चातुर्मास कलश स्थापना समारोह श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर , कांग्रेस मैदान में पाटलिपुत्र दिगम्बर जैन समिति के तत्वावधान में अपराह्न 1 बजे से भव्य आयोजन का शुभारंभ होगा।
चातुर्मास स्थापना समारोह के अविस्मरणीय पल का शुभारंभ 14 जुलाई रविवार के प्रातः नित्य अभिषेक , शांतिधारा , पूजन के पश्चात होगा। 
मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण , चित्र अनावरण , दीप प्रज्वलन के साथ गुरुदेव का पाद प्रक्षालन व मंगल चातुर्मास कलश स्थापना होगी , इसके उपरांत आचार्य श्री का मंगल प्रवचन होगा ।
बताया गया कि 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा व 17 जुलाई को वीर शासन जयंती पर्व विविध कार्यक्रमों के बीच हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। जिसमें काफी संख्या में जैन धर्मावलंबियों का जुटान होगा।

ज्ञातव्य हो कि आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज ससंघ का 45 वां चातुर्मास 2019 हेतु श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर , कांग्रेस मैदान में 11 जुलाई को गाजे-बाजे के साथ हर्षोल्लास पूर्वक गुरुदेव के जयकारों के बीच भव्य मंगल प्रवेश हुआ था।
जैन संतो के चार माह चातुर्मास के बीच गुरुदेव के सानिध्य में पटना नगरी में धर्म गंगा की धारा बहेगी। सभी श्रावक - श्राविकाएं को धर्म ज्ञान संस्कार प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त होगा।
इस दौरान धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं को धर्म प्रभावना करने की स्वर्णिम अवसर प्राप्त होगा , जिसमें कई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये जायेंगे।
जैन अनुयायी इस बीच धर्म ध्यान में जिनेन्द्र देव के भक्ति-आराधना कर पूण्य का संचय करेंगे।

जैन संत आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर जी महाराज ने बताया कि वर्षायोग यानि चातुर्मास के दौरान जैन साधु-साध्वी स्वकल्याण के उद्देश्य से ज्यादा से ज्यादा स्वाध्याय , प्रतिक्रमण , तप , ध्यान-साधना , सामयिक , प्रवचन तथा जिनवाणी के प्रचार-प्रसार धर्म प्रभावना को महत्व देते है।
धार्मिक उद्बोधन से हर भक्तों के मन मंदिर में जनकल्याण की भावना जाग्रत करने का प्रयास किया जाता है। तीर्थंकरों और सिद्धपुरुषों की जीवनियों से अवगत कराने की प्रक्रिया इस पूरे वर्षावास के दरम्यान निरंतर गतिमान रहती है।
धर्म ज्ञान ग्रहण कर श्रद्धालुगण अपना जीवन मार्ग प्रशस्त व धन्य करते है।
        
✍ प्रवीण जैन (पटना)


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