शांति की स्थापना बिना मूल्य के बनाए अहिंसा रूपी हथियार से ही संभव-  गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी

विश्व में कई प्रकार के अस्त-शस्त्र बनाए जा रहे हैं। ये सभी हथियार एक-दूसरे के विनाश के कारण बन रहे हैं। प्रतिदिन एक देश दूसरे देश पर हिंसा के द्वारा अपना अधिकार करना चाहते है। इससे कभी भी समाज में, देश में शांति नहीं हो सकती। शांति की स्थापना तो बिना मूल्य के बनाए गए अहिंसा रूपी हथियार से ही हो सकती है। एक न एक दिन सभी को अहिंसा रूपी शस्त्र का सहारा लेना ही पड़ेगा। 

यह बात नगर में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी भारत गौरव गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ने अपने मंगल प्रवेश के दौरान दिए गए प्रवचन में कही। महाराष्ट्र के नासिक जिले के ऋषभगीरी मांगी तुंगी से विहार कर अयोध्या हस्तिनापुर की ओर विहार कर रही 105 ज्ञानमती माताजी का मंगल प्रवेश आज सुबह बैंडबाजों के साथ महिलाओं द्वारा मंगल कलश लेकर समाजजनों के साथ हुआ। समाजजनों ने भजनों के साथ उनकी आगवानी की। इन्हीं की प्रेरणा से मांगी तुंगी तीर्थ क्षेत्र के पर्वत पर 108 फीट अखंड पाषाण की प्रतिमा का निमार्ण किया गया है। 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति रामनाथ काेबिंद ने विश्व शांति अहिंसा सम्मेलन को शुरू किया था। इसी उद्देश्य को लेकर नगर में उन्होंने समाजजनों को शांति व अहिंसा का संदेश दिया। माताजी ने समाजजनों व लोगों को विश्व शांति और अहिंसा का पालन करने का संकल्प दिलाया।



जन्मभूमि कुंडलपुर (बिहार) में धूमधाम के साथ राजकीय स्तर पर मनाया गया भगवान महावीर कुंडलपुर महोत्सव।

अहिंसा प्रवर्तक जैन धर्म के अंतिम 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव 17 अप्रैल को भारतवर्ष सहित विश्व भर में धूमधाम के साथ मनाया गया।

इस पावन अवसर पर भगवान महावीर की जन्म स्थली पवित्र धरती कुंडलपुर में दो दिवसीय राजकीय स्तर पर "कुंडलपुर महोत्सव" का भव्य आयोजन हुआ।
इस अवसर पर बुधवार की प्रातः बेला में जैन श्रद्धालुओं ने प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से प्रभात फेरी निकाली , जो गाजे-बाजे के साथ तीर्थ क्षेत्र प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से आरंभ होकर नंद्यावर्त महल प्रांगण की परिक्रमा करते हुए श्वेतांबर जैन मंदिर होते हुए नगर भ्रमण कर हर्षोल्लास पूर्वक जैन समाज ने भगवान महावीर के दिव्य संदेशो को जन-जन तक पहुंचाया।
इसके पश्चात रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा को विराजमान कर बैंड-बाजे , ढोल-नगारे के साथ नंद्यावर्त महल से कुंडलपुर नगरी नालंदा में धूमधाम से भव्य शोभायात्रा निकाली गई , जिसमें काफी संख्या में जैन श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
शोभायात्रा में भजन-कृतन करते जैन धर्मावलंबी बैंड-बाजे के धुन पर झूमते चल रहे थे , इस दौरान भगवान महावीर के जयकारों व जियो और जीने दो , अहिंसा परमो धर्म: जैसे दिव्य संदेशो "सत्य-अहिंसा के अवतार कुंडलपुर के राजकुमार" के नारों से कुंडलपुर नगरी गुंजयमान हुआ।

जैन मंदिर परिसर एवं शोभायात्रा में लहराते पंचरंगा जैन ध्वज काफी आकर्षक लग रहा था, फूल-मालाओं से सुसज्जित रथ लोगों को काफी आकर्षित कर रही थी ,जिसे देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
इस अवसर पर प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर व नंद्यावर्त महल में भगवान महावीर का जलाभिषेक , पंचामृत महामस्तकाभिषेक , शांतिधारा के उपरांत विशेष पूजा-अर्चना के साथ अन्य धार्मिक अनुष्ठान हुआ।
भगवान महावीर जन्म जयंती को लेकर वातारण धार्मिक आयोजनों से तृप्त हुआ।
आयोजन के दौरान जैन श्रद्धालु भजन-संगीत पर खूब झूमें और प्रभु के प्रति श्रद्धा-भक्ति समर्पित किया ।
इस भव्य जन्मोत्सव के अवसर पर देश-विदेश के कोने-कोने से जैन तीर्थावलंबियो का काफी संख्या में भगवान महावीर जन्मभूमि कुंडलपुर की पावन धरती पर आगमन हुआ।
वहीं भगवान महावीर 2618 वीं जन्म जयंती के अवसर पर कुंडलपुर में राजकीय स्तर पर दो दिवसीय "कुंडलपुर महोत्सव" का बुधवार की शाम में शुभारंभ हुआ।
महोत्सव का उद्घटान पटना प्रमंडलीय आयुक्त रॉबर्ट एल चोंगथू ने दीप प्रज्जवलन व महावीर स्वामी के पालना को झुलाकर किया।

पर्यटन विभाग बिहार सरकार और जिला प्रशासन नालन्दा के तत्वाधान में अयोजित कुंडलपुर महोत्सव का उद्घटान करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि आज का दिवस अत्यंत ही पवित्र है क्योंकि आज के ही दिन जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर अहिंसा उपदेशक भगवान महावीर स्वामी ने इसी कुंडलपुर की पावन धरती पर जन्म लिया था , आज इस धरती पर मुझे आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 
भगवान महावीर ने 2618 वर्ष पूर्व कुंडलपुर के धरती पर जन्म लिया एवं इस धरती से विश्व को शांति एवं सत्य अहिंसा का संदेश दिया था , भगवान महावीर के प्रमुख संदेशों में जियो और जीने दो , अहिंसा परमो धर्म: मुख्य है जो आज भी प्रासंगिक है।
अहिंसा के द्वारा ही सारे विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी भगवान महावीर के सत्य और अहिंसा के संदेश का पालन कर इस देश को आजादी दिलाई थी, नालंदा विश्व प्रसिद्ध स्थान जहां पर सर्व धर्म समभाव देखने को मिलता है प्रत्येक संस्कृति का संगम स्थल नालंदा है , भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति नालंदा जिले के पावापुरी में हुआ था।
भगवान महावीर का जन्म से लेकर निर्वाण कल्याणक तक की भूमि बिहार की पावन धरती ही रही है भगवान महावीर की जयंती के अवसर पर उनके संदेशों को व्यापक स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से कुंडलपुर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

नालंदा जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह स्वागत भाषण करते हुए कहा कि भगवान महावीर का उपदेश केवल प्रासंगिक ही नही बल्कि जीवन के लिए अमूल्य है वह हमें अच्छे कर्म दिखाते है भगवान महावीर के सिद्धांत को समझने की जरूरत है।

इस महोत्सव में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया , जिसमें भगवान महावीर के जीवन संदेश पर आधारित कार्यक्रम के साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कुंडलपुर महोत्सव में रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिका से हुआ , जिसे देख दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।
वहीं पहली प्रस्तुति लघु नाटक में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म से लेकर निर्वाण से जुड़े प्रसंगों की रोचक प्रस्तुति किया गया।
जिसके माध्यम से लोगो ने महावीर स्वामी के जीवन को जाना और इनसे जुड़े इतिहासों से रूबरु हुए , कार्यक्रम की शुरुआत महामंत्र नवकार की प्रस्तुति से हुई , इस मौके पर कलाकारों ने एक से बढ़ कर एक रंगा रंग प्रस्तुति दी।

वहीं पटना से प्रवीण जैन ने बताया कि भगवान महावीर जन्म जयंती जैनियों का सबसे प्रमुख त्योहार है, महावीर स्वामी का जन्म दिवस चैत्र की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है।
24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने दुनिया को सत्य-अहिंसा , दया, मैत्री , करुणा का संदेश दिया था।
एक राजा परिवार में जन्म लेने वाले वर्द्धमान महावीर ने राज-पाठ, परिवार, धन-संपदा छोड़कर युवावस्था में ही लोगों को सत्य, अहिंसा और प्रेम का मार्ग दिखाया ।
वर्द्धमान महावीर में क्षमा करने का एक अद्भुत गुण था और उनका कहना था कि "क्षमा वीरस्य भूषणम्", तीर्थंकर महावीर ने अपने सिद्धांतों को जनमानस के बीच रखा उन्होंने ढोंग, पाखंड, अत्याचार, अनाचारत व हिंसा को नकारते हुए दृढ़तापूर्वक अहिंसक जैन धर्म का प्रचार प्रसार किया।

वहीं कुंडलपुर महोत्सव में सैंड आर्टिस्ट के द्वारा बालू पर भगवान महावीर की अद्भुत कलाकृति उकेड़ी गई जो लोगो को काफी आकर्षित कर रही थी।
भगवान महावीर जन्मोत्सव को लेकर नंद्यावर्त महल , प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर आकर्षक ढंग से सजाया गया था , रंग-विरंगे लाइटों से मंदिर शिखर व पूरा परिसर जगमगा रहा था।
इस पावन अवसर पर काफी संख्या में जैन धर्मावलंबियों का जुटान हुआ।
कुंडलपुर महोत्सव के आयोजन को लेकर स्थानीय दिगम्बर जैन समिति कुंडलपुर ने भी तैयारियां जोर-शोर से की थी।

ज्ञात हो कि इस पावन पवित्र पर्व पर राज्य में बिहार सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष निरामिष दिवस घोषित किया जाता है, अहिंसा प्रवर्तक भगवान महावीर के जयंती (अहिंसा दिवस) पर सरकार द्वारा इस दिन पशु-पक्षी , मत्स्य , जानवरों आदि के वध को रोकने का निर्देश दिया जाता है।
    



प्रतिदिन करें प्रार्थना, परोपकार व प्रणाम आएंगे चमत्कारिक परिणाम - राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ 

मुंबई, 28 नवम्बर। मीरा रोड इस्ट कनकिया स्थित रश्मि विला में पूज्य आचार्य श्री पद्मसागर सूरि जी म., आचार्य श्री हेमचन्द्र सागर सूरिजी, आचार्य श्री विवेकसागर सूरिजी और राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी व राष्ट्रसंत श्री चंद्रप्रभ जी के साथ अनेक मुनि भगवंत और साध्वी भगंवतों का धर्म समागम समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आदिनाथ जैन मंदिर, भायंदर से धर्म जुलूस निकला जो मीरा रोड पहुंचकर धर्मसभा में बदल गया। इस दौरान गणिवर्य श्री प्रषांतसागरजी, पूज्य श्री नीति सागरजी, साध्वी श्री नलीनीयषाजी, श्रमण संघीय साध्वी श्री सोरभसुधाजी भी उपस्थित थे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पदमसागर सूरिजी ने कहा कि संत के दो धर्म है ज्ञान और ध्यान और गृहस्थ के दो धर्म है दान और पूजा। उन्होंने कहा कि इंसान केवल मेहनत और बुद्धि से आगे नहीं बढ़ता। मेहनत करने वाला मजदूर चार सौ रुपये कमाता है तो बुद्धि रखने वाला इंजिनियर चार हजार रुपये, पर कोई अगर प्रतिदिन लाखों रुपये कमा रहा है तो इसका मतलब उसकी पुण्याई प्रबल है। पुण्याई दान देने से बढ़ती है। प्रकृति में हर चीज लौटकर आती है। जो मानवता के नाम दस रुपये लगाता है भगवान उसे हजार गुना करके लौटाता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जीवन में दान देने की आदत डाले। चाहे थोड़ा ही दो, पर रोज दो। जो करना है अपने हाथों से करके जाना। कल का कोई भरोसा नहीं है और हमारे पीछे हमारे नाम पर दान-पुण्य होगा इस बात पर भी भरोसा मत करना। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा सदा वहाँ बरसती है जहाँ इनका सदूपयोग होता है। इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं कुछ खाकर खुश होते हैं तो कुछ खिलाकर। जो खाकर खुश होते हैं वे सदा औरों पर आश्रित रहते हैं, पर जो खिलाकर खुश होते हैं उनके भंडार प्रभु-कृपा से सदा भरे हुए रहते हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रसंत श्री चंद्रप्रभ जी ने कहा कि प्रतिदिन प्रणाम, प्रार्थना और परोपकार करें इससे जीवन में चमत्कारिक परिणाम आएगा। सुबइ उठकर बड़ों को प्रणाम कर दुआएं लें। एक-दूसरे को प्रणाम करने से परिवार का वातावरण आनंदमय हो जाता है। जब से प्रणाम करने की आदत कम हुई है तब से परिवारों के टूटने और तलाक बढने की बाढ़-सी आ गई है। जिस घर में सुबह की शुरुआत प्रणाम से होती है वहाँ कभी कलह का वातावरण निर्मित नहीं हो सकता। संतप्रवर ने कहा कि धर्मस्थान में हम आधा घंटा-एक रहते हैं और घर में तेइस घंटे इसलिए धर्म की शुरुआत मंदिर-मस्जिद-चर्च-गुरुद्वारे से नहीं घर से की जानी चाहिए। जो माता-पिता का न हो पाया वह भला परमात्मा का क्या हो पाएगा। संतप्रवर ने कहा कि जिस मंदिर को हमने बनाया हम उसकी तो पूजा करते हैं, पर जो माँ-बाप हमें बनाते हैं हम उसकी पूजा क्यों नहीं करते। अगर व्यक्ति केवल घर के सात-आठ लोगों के बीच रहने और जीने की कला सीख जाए तो उसका जीवन स्वर्ग बन जाए। 
सामूहिक प्रार्थना करने का मंत्र देते हुए संतप्रवर ने कहा कि अगर घर के सभी लोग सुबह उठकर सामूहिक प्रार्थना करेंगे तो पूरे घर का आभामण्डल ठीक रहेगा। अगर हमारे जीवन या घर पर ग्रह-गोचरों का नकारात्मक प्रभाव है तो वह भी प्रार्थना करने से दूर हो जाएगा। संतप्रवर ने उद्योगपतियों से कहा कि वे फेक्ट्री में भी सुबह-सुबह प्रार्थना करवाएँ। एक माह बाद चमत्कार होगा, उत्पादन दुगुना हो जाएगा और फेक्ट्री का वातावरण मधुर बन जाएगा।
कार्यक्रम का मंच संचालन विनीत गेमावत ने किया और आभार कार्यक्रम आयोजक पारस चपलोत ने दिया। इस अवसर पर चपलोत परिवार का दिव्य सत्संग समिति एवं भायंदर जैन श्री संघ द्वारा अभिनंदन किया गया।



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