पहले आदमी जेब भर कर जाता था और जी भर कर लाता था,अब कितना भी ले जाए,जेब भर कर ही ला पाता है - आचार्य अनुभव सागर जी महाराज

डूंगरपुर- गैप सागर की पाल पर आयोजित वार्षिक रथयात्रा महोत्सव के प्रथम दिवस प्रातः कालीन धर्म सभा को संबोधित करते हुए युवाचार्य प्रखर वक्ता श्री अनुभव सागर जी महाराज ने अपनी मनमोहक शैली में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा,कि आधुनिक युग में रुपए की कीमत उतनी नहीं गिरी जितना की रुपए के लिए आदमी गिर गया है ।
लोग कहते हैं महंगाई बढ़ गई है परंतु यह नहीं देखते कि हमारी ख्वाहिशें भी बढ़ गई हैं। प्रतिष्ठा, प्रतिस्पर्धा और प्रदर्शन के चक्कर में हम अपने जीवन मूल्यों को खोते जा रहे हैं।संतों ने कभी यह नहीं कहा,कि धन मत कमाओ। संतों ने यह भी नहीं कहा कि धन को संभालो मत किंतु उन्होंने हमेशा यह भी कहा है कि *धन के प्रति मूर्छा मत रखो*
 यह सिद्धांत है कि हम जितना छोड़ते हैं उससे कहीं ज्यादा हम तक लौट कर आता हैं।
आदमी पहले जब बाजार जाता था तो जेब में कुछ रुपया लेकर जाता था जी भर का माल खरीद के लाता था,किंतु अब वह नौकरी के चक्कर में पड़ गया है।बड़ों ने कहा है- उत्तम खेती मध्यम व्यापार जघन्य नौकरी,लेकिन वर्तमान दौर में आदमी इसका उल्टा चल रहा है,उसे तो नौकरी उत्तम लगने लगी है।
नौकरी मतलब एक कमाए जिसमें बस परिवार का ही गुजारा चल पाय। धीरे-धीरे जरूरतें इतनी बढ़ी कि नौकरी से चाकरी पर आ गया ।
चाकरी मतलब परिवार टूटने लगे, हम दो हमारे दो की मानसिकता के साथ इतनी कमाई जिसमें चारों का गुजारा ही होता है मगर आदमी ने अपने चादर से ज्यादा पैर पसारे,परिणाम निकला,कि वह वेतन पर पहुंचकर वेतन यानी जितने में दो का ही गुजारा हो जाये।इतने में भी अपनी जरूरतों को संतुलित करने की बजाय वह मनमानी के चक्कर में तनख्वाह तक पहुंच गया,जहां एक आदमी की कमाई से एक छत के नीचे सारा परिवार एक साथ आनंद में जीवन यापन कर लेता था,यह तनख्वाह वाला आदमी अपने तन की ही पूर्ति कर ले इतना ही बहुत है।
 सच ही है जरूरतें तो भिखारी की भी पूरी हो जाती है,परंतु इच्छाएं चक्रवर्ती की भी पूरी नहीं हो पाती ।
धर्म सभा से पूर्व जिनेंद्र भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांति धारा आचार्य श्री के सानिध्य में उनके मुखारविंद से संपन्न हुई। दिनांक 24 सितंबर से 28 सितंबर तक दशहरा मैदान में प्रातः 8:30 बजे से 10:00 बजे तक  प्रारंभ होने वाली रामकथा की तैयारियों को लेकर भी समाज जनों ने अपनी आर्थिक राशि की घोषणा की।



क्षमावाणी पर्व पर मंदारगिरी दिगम्बर जैन मंदिर में वार्षिक पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन

बौंसी (बांका) बिहार - मंदारगिरी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में शनिवार को क्षमावाणी पर्व के अवसर पर स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों के पत्रकारों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी के अंतर्गत श्री मंदारगिरी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र प्रबंधन समिति की ओर से वार्षिक पत्रकार सम्मान समारोह के अवसर पर की गई।

जैन धर्म की खबर को जन-जन तक अखबारों के माध्यम से धर्मप्रभावना के उद्देश्य से प्रकशित करने हेतु जैन प्रबंधन समिति की ओर क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने सभी पत्रकारों व अखबार परिवार को धन्यवाद दिया।

पत्रकारों ने कहा कि जैन धर्म की खबर को अखबार में प्रकाशित करना हमारा काम के साथ साथ जैन धर्म के संदेशों को जन-जन तक पहुंचना है।
हमने कभी इस कार्य को अपना पेशा नही समझा , जैन धर्म की खबरों से हमें भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इस अवसर पर मंदार क्षेत्र के पत्रकारों ने कहा कि भगवान वासुपूज्य के तप, ज्ञान व निर्वाण कल्याणक भूमि मंदारगिरी जैन मंदिर में इस सम्मान को पाकर हम गौरवान्वित महसूस कर रहे है। वहीं इस मौके पर क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन कहा कि आज के युग में पत्रकारिता का बड़ा महत्व है पत्रकारिता के माध्यम से पीड़ित व्यक्तियों को न्याय मिला है हमें मीडिया का हर क्षेत्र में सम्मान करना चाहिए।
पत्रकार हमेशा मजबून और मजबूर की मदद के लिए तत्पर रहता है। 
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं वरन मिशन है। पत्रकार हमेशा निष्पक्ष भूमिका में रहता है समय आने पर परिवारजन के खिलाफ भी कलम चलानी पड़ती है। मीडिया अपने कलम के बल पर अपराधियों को बेनकाब करता है और प्रत्येक आमजन की समस्याओं को प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने में पूरा सहयोग करता है।सम्मान समारोह के अवसर पत्रकार हरिनारायण सिंह , संजीव पाठक , माखन सिंह , शेखर सिंह व अन्य सहित जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

 



कल निकाली जाएगी मंदारगिरी बिहार में  तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की भव्य शोभायात्रा निर्वाण लाडू चढ़ायेंगे

जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के निर्वाण महोत्सव पर कल गुरुवार को मंदारगिरी में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।

शोभायात्रा की रूपरेखा एक नजर में
क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने बताया कि भगवान वासुपूज्य की प्रतिमा जी को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर प्रातः 6 बजे बौंसी स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर से गांधी चौक , हनुमान चौक , वापस मधुसूदन मंदिर , पंडा टोला , बारामती जैन मंदिर , पापहरणी रोड के रास्ते मंदार पर्वत तलहटी स्थित जैन मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।  तत्पश्चात जैन श्रद्धालु पारंपरिक केसरिया परिधान में प्रतिमा जी को अपने मस्तक पर लेकर मंदार पर्वत शिखर स्थित जैन मंदिर तक जाएंगे। जहां विधि विधान पूर्वक भगवान वासुपूज्य का महामस्तकाभिषेक , जलाभिषेक , शांतिधारा व विशेष पूजन-अर्चना के उपरांत जैन अनुयायी धूमधाम के साथ भव्य निर्वाण लाडू चढ़ायेंगे।

निर्वाणोत्सव की तैयारी पूरी।
भगवान वासुपूज्य निर्वाण महोत्सव के आयोजन व पर्युषण महापर्व को लेकर मंदारगिरी में धूम है। इस आयोजन की तैयारी मंदारगिरी दिगम्बर जैन प्रबंधन द्वारा कर ली गई है। दिगम्बर जैन मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और रथ का रंग-रोगन कर तैयारी पूरी कर ली गई है। इस अयोजन पर काफी संख्या में जैन तीर्थयात्रियों का सम्मिलित होने की संभावना है।

आज ही के दिन भगवान वासुपूज्य को मंदार से प्राप्त हुआ था मोक्ष
मालूम हो कि भगवान वासुपूज्य स्वामी का तप , ज्ञान व निर्वाण स्थली मंदारगिरी की पावन धरा ही है। बताया गया कि भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को मंदारगिरी पर्वत शिखर के चोटी से ही भगवान वासुपूज्य को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

नौवें दिन मनाया गया उत्तम आकिंचन्य धर्म , उत्तम ब्रह्मचर्य के साथ पर्व का आज समापन।
जैन धर्मावलंबियों के दस दिवसीय महापर्व दशलक्षण के नौवें दिन बुधवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना की गई। प्रातः बेला जिनालय में विधिवत रूप से नित्य अभिषेक , शांतिधारा व विशेष पूजा-पाठ किया गया।
इस दौरान भक्तिपूर्ण वातावरण में मंगलाष्टक स्त्रोत्र , मंगल पाठ , विनय पाठ के पश्चात जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम आकिंचन्य धर्म को अंगीकार कर समुच्चय पूजन , रत्नत्रय पूजा , सोलहकारण पूजा , दसलक्षण धर्म पूजा श्रद्धापूर्वक किया। वहीं संध्या बेला में भजन , महाआरती का आयोजन किया।
इस अवसर पर देश के अन्य प्रांतों से पहुंचे जैन तीर्थयात्रियों के अलावे क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन , उपप्रबंधक राकेश जैन , उपेंद्र जैन , राहुल जैन सहित विपिन जैन , प्रवीण जैन , नीतू जैन , शिल्पी जैन , खुशी जैन , मिंकू जैन आदि काफी संख्या में जैन श्रद्धालु शामिल हुए।

मैं और मेरा का त्याग करना ही है आकिंचन्य धर्म
मीडिया प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि त्याग करने के पश्चात त्याग के अहं का भी त्याग करना आकिंचन्य धर्म है। ' मैं ' और ' मेरा ' ये भी एक परिग्रह है जिसे त्याग करना आकिंचन्य धर्म है। उत्तम आकिंचन्य धर्म हमें मोह को त्याग करना सिखाता है। मोक्ष महल तक पहुंचने के लिए आत्मा के भीतरी मोह का त्याग करके ही आत्मा को शुद्ध बनाया जा सकता है। सब मोह पप्रलोभनों और परिग्रहों को छोड़कर ही परम आनंद मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। इस संसार में हमारा कुछ भी नही है यहां तक कि यह शरीर भी हमारा नही है ऐसा विचार करते हुए हमें आकिंचन्य धर्म अंगीकार करना चाहिए।



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